अध्यक्ष का सन्देश

विश्वविद्यालय केवल अभियंता, चिकित्सक, विधिवेत्ता, वैज्ञानिक और कुशल व्यापारी तथा शास्त्रज्ञ विद्वान ही तैयार न करें बल्कि ऐसे व्यक्तियों का निर्माण करें, जिनका चरित्र उज्ज्वल हो, जो कर्तव्यपरायण और मूल्य निष्ठा से ओत प्रोत हों... आगे पढ़ें

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अध्यक्ष का सन्देश


''विश्वविद्यालय केवल अभियंता, चिकित्सक, विधिवेत्ता, वैज्ञानिक और कुशल व्यापारी तथा शास्त्रज्ञ विद्वान ही तैयार न करें बल्कि ऐसे व्यक्तियों का निर्माण करें, जिनका चरित्र उज्ज्वल हो, जो कर्तव्यपरायण और मूल्य निष्ठा से ओत प्रोत हों। विश्वविद्यालय को अर्जित ज्ञान के स्तर को प्रमाणित कर डिग्रियाँ देने वाली संस्था मात्र न होकर सुयोग्य और सद्चरित्र नागरिको की पौधशाला होना चाहिए।''

निजी विश्वविद्यालयों को आत्मनियंत्रित होकर इस लक्ष्य की पूर्ति की दिशा में कार्य करते हुए मध्यप्रदेश को स्वर्णिम राज्य बनाने में अपनी भूमिका सुनिश्चित करनी होगी।